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कान की समसà¥à¤¯à¤¾
कà¥à¤¯à¤¾ है ओटाइटिस मीडिया? ओटाइटिस ओट व आइटिस से मिलकर बना शबà¥à¤¦ है। ओट का अरà¥à¤¥ है कान, आइटिस यानी सूजन, व मीडिया यानी मधà¥à¤¯à¥¤ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ कान के मधà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤— में सूजन आना। हमारा कान तीन à¤à¤¾à¤—ों से मिलकर बना होता है। पहला बाहà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤—, जिसमें पिनà¥à¤¨à¤¾ व केनाल आते हैं। दूसरा मधà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤— जिसमें कान के परà¥à¤¦à¥‡ के पीछे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ तीन सूकà¥à¤·à¥à¤® हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚-मेलियस, इंकस, सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ªà¤¿à¤¸ के अलावा यूसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚ब तथा मेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤¡ à¤à¤¯à¤° सेलà¥à¤¸ शामिल हैं। तीसरा आंतरिक à¤à¤¾à¤— लेबिरिनà¥à¤¥ होता है, जिसमें कॉकà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾, संतà¥à¤²à¤¨ बनाने वाली तीन घà¥à¤®à¤¾à¤µà¤¦à¤¾à¤° केनाल व अनà¥à¤¯ सूकà¥à¤·à¥à¤® संरचना होती है। ओटाइटिस मीडिया में कान का परà¥à¤¦à¤¾, हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ व मेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤¡ सेलà¥à¤¸ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती हैं। इसके मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ दो पà¥à¤°à¤•ार होते हैं। पहला, à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट जिसमें अचानक से संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। यहां अचानक से अरà¥à¤¥ दो हफà¥à¤¤à¥‡ तक है। डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• इसमें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय होने पर अवसà¥à¤¥à¤¾ कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• कहलाती है। वैसे कई विशेषजà¥à¤ž 6 हफà¥à¤¤à¥‡ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ को ही कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• मानते हैं। यह बहरेपन का सबसे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण है, जो ठीक हो सकता है। इन दोनों अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के जहां लकà¥à¤·à¤£ अलग-अलग हैं, वही इलाज के तरीके à¤à¥€à¥¤ à¤à¤• अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• 10 में से 6 लोगों को 6 साल की उमà¥à¤° तक में ही à¤à¤• या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार à¤à¤•à¥à¤¯à¥à¤Ÿ ओटाइटिस मीडिया हो चà¥à¤•ा होता है। 15 फीसदी लोगों में कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ मिलती है।
कारण - नाक व गले का संकà¥à¤°à¤®à¤£ कान में पहà¥à¤‚च सकता है। यह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° वायरस या बैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤œà¤¨à¤¿à¤¤ होता है। जà¥à¤•ाम रहने पर नाक से कान तक जाने वाली यूसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚ब कारà¥à¤¯ करना बंद कर देती है, जिससे परà¥à¤¦à¥‡ के पीछे दबाव असामानà¥à¤¯ हो जाता है। वहां सूजन आने लगती है। इसके फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प कई बार परà¥à¤¦à¥‡ में छेद हो जाता है। जो कà¥à¤› में सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ रह जाता हैं। टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤²à¥à¤¸, बड़े हà¥à¤ à¤à¤¿à¤¡à¤¨à¥‰à¤‡à¤¡à¥à¤¸, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• राइनाइटिस व साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ इसका कारण बनती है। à¤à¥€à¥œà¤à¤¾à¤¡à¤¼ वाली व गंदगी में रहने वाले कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ लोगों में यह समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। कà¥à¤›à¥‡à¤• बार कान में चोट लगने पर बाहà¥à¤¯ संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¥€ यहां पहà¥à¤‚च सकता है। कà¥à¤› लोगों में परà¥à¤¦à¥‡ में छेद न होकर, इसके पीछे दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ इकटà¥â€Œà¤ ा रह जाता है, जिसे सिकà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ ओटाइटिस मिडिया या गà¥à¤²à¥‚ ईयर कहते हैं।
लकà¥à¤·à¤£ - à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट अवसà¥à¤¥à¤¾ में कान में अचानक दरà¥à¤¦ व à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ होता है। बà¥à¤–ार, चिड़चिड़ाहट, बेचैनी रह सकती है। कई बार कान बहना आरंठहो जाता है, जिसके बाद दरà¥à¤¦ में आराम मिलता है। कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ दरà¥à¤¦ नहीं होता है। इसमें कान बार-बार कà¥à¤› समय के लिठया लगातार बहता है, सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ कम देने लगता है। कई लोगों में समसà¥à¤¯à¤¾ केवल परà¥à¤¦à¥‡ व सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ तक ही सीमित रहती है, लेकिन कà¥à¤› में यह आस-पास की संरचनाओं को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकती हैं। हडà¥â€Œà¤¡à¥€ गलाने वाली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ कोलेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤à¤Ÿà¥‹à¤®à¤¾ से कान में से बदबू आने लगती हैं। इलाज न लेने पर संकà¥à¤°à¤®à¤£ दिमाग में पहà¥à¤‚चकर बà¥à¤°à¥‡à¤¨ à¤à¤¬à¥à¤¸à¥‡à¤¸, पीछे मेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤¡à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ व लेटरल साइनस थà¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸, अंदर बढ़ने पर लेबà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¥à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ व मेनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ जैसी जटिल बीमारी पैदा कर सकता है। फेशियल नरà¥à¤µ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने पर चेहरा टेà¥à¤¾ हो सकता है। घà¥à¤®à¤¾à¤µà¤¦à¤¾à¤° केनाल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने पर चकà¥à¤•र आ सकते हैं। सीकà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ में कान नहीं बहता है। सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देना कम होने के साथ कान बंद रहता है।
इलाज - à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट अवसà¥à¤¥à¤¾ को दवाओं से ठीक किया जाता है। बार-बार यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होने का कारण यदि टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤², à¤à¤¡à¤¿à¤¨à¥‰à¤‡à¤¡à¥à¤¸ व साइनस समसà¥à¤¯à¤¾ है तो इनका à¤à¥€ इलाज किया जाता है। सीकà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ में कई बार माइरिनà¥à¤—ोटॉमी की जाती है, जिससे परà¥à¤¦à¥‡ से दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ बाहर निकाला जाता हैं तथा वेंटिलेशन टà¥à¤¯à¥‚ब डाले जाते हैं।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत - कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत होती है। दवा से संकà¥à¤°à¤®à¤£ काबू में किया जाता है परà¥à¤¦à¥‡ के छेद को ठीक करने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ सरà¥à¤œà¤°à¥€ को टिमà¥à¤ªà¥‡à¤¨à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥€ कहते हैं। यह अनà¥à¤¡à¤°à¤²à¥‡ या इनà¥à¤Ÿà¤°à¤²à¥‡ तकनीक से हो सकती है। मेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤¡ हडà¥à¤¡à¥€ में गलने पर इसे दà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ करना जरूरी होता हैं ताकि संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ खतरों से बचा जा सके। इसे मेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤¡à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¥€ कहते है। यह दो पà¥à¤°à¤•ार से होती हैं केनाल वॉल डाउन, जिसमें रोग दूर होने पर कान के अंदर केविटी बन जाती हैं व केनाल चौड़ी की जाती हैं। दूसरा इंटेकà¥à¤Ÿ केनाल वॉल, जिसमें कान का आकार व बनावट कायम रखा जाता है।
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